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मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

हुआ कुछ यूँ


हुआ कुछ यूँ कि मैंने जानकर ना जाना उसे
हुआ कुछ यूँ कि मैंने मानकर ना माना उसे
ऐसा कहा गया था

हूआ कुछ यूँ कि जानने के बाद
कुछ जानने कि इच्छा ना रही
हुआ कुछ यूँ कि मानूँ किसे
ये पता चल गया मुझे

रविवार, 21 अक्टूबर 2012

एकतरफा प्यार

एकतरफा प्यार
किसी बोद्ध भिक्षु की किताब के पन्नों से टकरा 
मर गया मच्छर
फूल की पंखुड़ी की तरह 
चिपका है पन्ने से
और अफसोस में
अभिशाप झेलता 
बोद्ध-भिक्षु 
तड़प तड़प के इस दिल से
आह निकाल 
समाधि ले 
कर्मविमुख 
हो रहा है
स्मृति से विस्मृत है उसकी
प्यार से पहले की अवस्था में
पढ़ा ये काव्यांश
चाहे कुछ हो
'जीवन नहीं मरा करता है'

मंगलवार, 24 जुलाई 2012

क्या मैं आदमी हूँ

तुमने कहा कभी तो हँसा करो,
मेरे लिए ही सही

मैंने अपने आँसुओ को सुखा दिया।
और दाँत दिखाकर हँसने लगा।

तुमने कहा तुम गुस्सा बहुत करते हो।
चिल्लाते क्यों रहते हो हर वक्त।

मैंने पाया
मेरी दुम निकल आयी है।
और मेरी जीभ से लार टपक रही है।

तुमने कहा
इर्रिटेट होना अच्छी बात नहीं।

मैंने अपने दिल के सारे घावों को ढँक लिया
और सेल्समैन की तरह हर बात पर मुस्कराने लगा।


फिर एक दिन तुमने कहा।
तुम 'वो आदमी' नहीं जिससे मैंने प्यार किया था।

मैं सोचने लगा
क्या मैं 'आदमी' हूँ।

शनिवार, 26 मई 2012

तुम्हारी आँखें मेरे नाम से ज्यादा खूबसूरत हैं।


तुम्हारे होंठों से
हज़ारों बातों को, सुनने की
चाहत कभी न थी।
बस, नाम मेरा
एक बार भी
तुम्हारे होंठों से न छुआ।
तुमने जब कहा 'तुम'
मैं सर्वनामों में संज्ञा तलाशने लगा
तुम्हें सब कुछ पता है
एक मेरे नाम के सिवा

मेरा चाहत रही सदा
तुम मेरा नाम पुकारों
और तुमने मुझे देख भर लिया।
तब जाके मैं समझा कि तुम्हारी आँखें
मेरे नाम से ज्यादा खूबसूरत हैं।

सोमवार, 23 अगस्त 2010

खाआआअ ...........प

"मैं तुम्हे चाहता हूँ"
यही कहा था उसने
कि आसमान सिर पे आ गिरा था उसके
मुझे याद है अब भी

वो मेरी गली का सबसे होशियार लड़का था
कोलेज में अव्वल आया था
लडकियां मरती थी उस पर
पर उसका दिल सिर्फ एक पर आया था
लोग कहते हैं कि वो उसकी बहन थी

'बहन'

बहन कैसे?
मैं तो इकलौता लड़का हूँ
वह बार रिरियाता था

अरे !
दूर के रिश्ते की
वो बहुत खूबसूरत थी
नाम मुझे याद नहीं आ रहा
बहुत ही प्यारा नाम था उसका...
दोनों एक-दूसरे को बहुत चाहते थे

फिर एक दिन
उसकी लाश
यमुना पुश्ते पर मिली
यही बताया था मोहल्ले के एक बुज़ुर्ग ने मुझे

कुछ समझ न आया
अजब सी गंध थी मोहल्ले में उस दिन
फिजा में दो शब्द ताल ठोंक रहे थे
खाआआअ ...........प

गुरुवार, 22 जुलाई 2010

ज्यादा दिन नहीं बीते हैं..

जब दो युगल बैठे थे
पेड़ की आड़ लिए
तुमने फुसफुसाया था कानो में
पेड़ कट गया था अगले ही पल

तिमारपुर के केस को बीते
ज्यादा वक़्त नहीं गुज़रा है अभी
पाले बदलते रहते हैं बस
प्यार पर बंदिशें लगती रहती हैं बस

प्रेमियों को डरना पड़ता है
'डर के आगे जीत है' जैसे वाक्य तो अब सुनने को मिलने लगें हैं
वर्ना तो दुनिया '...प्यार किया तो डरना क्या' जैसे एक गीत के सहारे ही
दीवारों में चुन जाने के लिए तैयार रहती थी

ज्यादा दिन नहीं बीते हैं..

तुम्हारे मोहल्ले में कई कुत्ते पीछे लग गए थे
रीना के, याद होगा तुम्हे
तुम भी तो उनके साथ थे
रीना ने जींस क्या पहन ली थी
तुम्हे तो सूंघने का मौका मिल गया था
तुम सबने मिलकर गोश्त चूसा था
चटखारे लिए थे इस समाज ने

रीना ने पहल की थी
तुमने दबा दी थी
''मोडर्न हुआ चाहती थी साली''
कानो में अब भी गुंजायमान है मोहल्ले के

तुम और तुम्हारे साथी
फिकरे कसते हों युगलों पर
छेड़ते हो लड़कियों को
बंदिशें लगाते हो प्रेम पर
तमाचे मारते हो लोकतंत्र पर
लानत देते हो सरकार की कारगुजारियों पर

कभी पूछा है अपने घर की औरतों से
तुमने,
वो क्या चाहती हैं ?

रविवार, 22 नवंबर 2009

यहाँ मकानों की बुलंदी आदमी की.....

सर्दी शुरू हो रही है
लोगों की बाहें बंधने लगीं है

बाहें घर जाकर खुल जाती है
वहां गर्मी है या कहूं
उसका एहसास है

लेकिन वहां घर नहीं है
बल्कि उसकी आस है

बाहों के खुलने से रिश्ते टूट जाते है
घरवाले घर के बाहर खुश है
घर आकर रूठ जाते है

अब वो घर नहीं
जहां सर्दी जगह बना ले
यहाँ मकानों की बुलंदी
आदमी की तरह
गर्मी को भी पैदा करती है

इसलिए लोगों की बंधी बाहें
घर जाके खुल जाती है

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2009

'दिवाली मुबारक हो'



कल दीपावली है
कुछ लोग
पटाखे जलाएंगे
कुछ लोग
दिल ।

एक तबका वो होगा
जिसके बंग्लो और कोठियो पर
लड़ियों की जगमगाहट होगी
कीमती मोमबत्तियाँ और दिये जलेंगे
और एक वो
जहाँ शायद चूल्हा भी ना जले।

शराब की
सप्लाई के साथ डिमांड भी बढ़ जाएगी
जुआरियों के लिए
जश्न का दिन होगा कल
ना जाने कितनो की दिवाली होगी
और कितनो का दिवाला निकलेगा ।

घरों में
लक्ष्मी की पूजा होगी
लेकिन बाहर लक्ष्मी,
लक्ष्मी की आस में
लक्ष्मणरेखा पार कर रही होगी ।

ऐसे ही दिवाली मनेगी
हर साल मनती है
मैं पिछले कई सालों से
यही देखता आया हूँ

'दिवाली मुबारक हो' के पोस्टर
चौराहों पर चिपके मिलेंगे
जिसमें बेगै़रत नेता
बदसूरत छवि लिए
हाथ जो़ड़े दिखेंगे ।
जो इन्हीं पोस्टरों के पीछे से कहेंगे
कि
चाहे किसी के पास कुछ हो
या ना हो
भले ही किसी के घर में
आग लगे-चोरी हो
चाहे दिल्ली में कोई
सुरक्षित हो या ना हो
चाहे कहीं पर भी लोग मरें, ब्लास्ट हो
पर सभी को
हमारी तरफ़ से
'दिवाली मुबारक हो ।'


(पुन: प्रकाशित )

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2009

करण जौहर के लिए.......बधाई संदेश

अब तो बहुत खुश होगे तुम

बहुत अच्छा लग रहा होगा न तुम्हे

राज ठाकरे के आगे नतमस्तक होके ,

हंसल मेहता की तरह अपमानित नहीं होना पड़ा न तुम्हे?

कालिख नहीं पुतवानी पड़ी न अपने मुँह पर?

बधाई हो।


तुम्हे डर सता रहा होगा न?

डर होगा

कहीं जो हंसल मेहता के साथ हुआ

वही तुम्हारे साथ भी न हो जाए।


'दिल पे मत ले यार' की सीख देने वाले

हंसल मेहता तो पागल थे या कहें बेवकूफ थे

माफ़ी मांगने में आनाकानी जो कर रहे थे

भूल गए थे की................'मुंबई किसकी है?'

पर बधाई हो तुमने याद रखा।


सचमुच कितने बेवकूफ थे हंसल मेहता

मुँह पर कालिख पुतवा कर

सार्वजनिक रूप से अपमानित होकर

पिट-कर

अस्तित्व(जीवन) संकट होने पर

उन्होंने माफ़ी मांगी।

सचमुच आज के समय में कितने बेवकूफ लगते है वो।


लेकिन तुम कितने समझदार,

कितने प्रोफेशनल हो न ?

सीधे माफ़ी ही मांग ली ..........और

'सिड' को जगाने के

लिए खुद आँखे 'मूंद' ली

बधाई हो।

शुक्रवार, 4 सितंबर 2009

जो अब तक लिखा नही गया था

आज भी मै वहीं बैठा हूँ

जहाँ उस दिन बैठा हुआ था ।

तुम्हारे पास लेकिन तुमसे दूर

वहीं

जहाँ आज भी तुम्हारी देह या उसी जैसा कुछ

रखा हुआ है इसी खाली कुर्सी पर

जिसकी आत्मा पर लोगो ने नोवेल लिख डाले

और मै कुछ न लिख सका ।

क्योंकि तुम मेरे दिल में थी दिमाग में नही,

जबकि लेखन तो दिमाग की उपज बन चुका है न आज ।

उसी कुर्सी पर

आज मै एक अजीब सी बदहवासी

एक अजीब सी खामशी देख रहा हूँ

मेरे दोस्त कहते है मेरा दिमाग चल गया है

क्या अजीब अजीब चीजे (न दिखने वाली) देखता है?

हाँ, उनके लिए ये फीलिंग चीजे ही तो है ,

लेकिन मेरे लिए ये न ख़त्म होने वाला इंतज़ार है ।

शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

भ्रूण की आवाज़

मैंने कब कहा
मुझे तुम प्यार करो ।

मैंने कब कहा
मेरा ध्यान रखो ।

बस

मुझे पेट में न मारा करो ।
(पुन:प्रकाशित )

बहुत देर कर दी सनम कहते-कहते

जब मैंने कहा
मुझे तुमसे प्यार है
तुमने कुछ नही कहा
बस
तुम हँस दीं ।

जब मैंने कहा
मैं तुम्हें चाहता हूँ बेपनाह
तुमने कुछ नही कहा
बस,अपनी उँगलियाँ मेरे होंठो पे रख दीं ।

जब मैंने कहा
चलो आज फिल्म देखने चलते हैं
तुमने कुछ नही कहा
तुम मुस्कुराईं और क्लास लेने चलीं गईं ।

जब मैंने कहा
शाम मस्तानी है पार्क में चलें क्या ?
तुमने तब भी कुछ नही कहा
मेरा हाथ थामा और चल दीं ।

जब मैंने कहा
शादी करोगी मुझसे
तुमने कहा- पागल हो गए हो क्या ?
आज के बाद हम कभी नही मिलेंगे ।
(पुन:प्रकाशित )

बुधवार, 26 अगस्त 2009

बरसात की एक शाम

इस मौसम की सबसे जोरदार बरसात
अबके नहीं आई मुझे तुम्हारी याद ......क्यों?
क्या इसलिए
कि मै
अब तक
अपने घर के निचले तल से
पानी निकालने में व्यस्त था
या फिर अब तक
घर न लौटे भाई की
चिंता सता रही थी मुझे
या फिर इन सबसे अलग
मैंने पहली बार सोचा
कि मै तुम्हे क्यों याद करता हूँ
जबकि
प्यार की ग़लतफहमी भर है मुझे

गुरुवार, 20 अगस्त 2009

उसके मरते ही,,,,,

उसके मरते ही
अचानक ही
सब कुछ पीला हो गया
चेहरे का रंग.......
फैक्ट्री में रखा माल
घर में बनी दाल
घरवालों का हाल
और जो कुछ पीला ना हो सका
वह था
उसकी आँखों का रंग
जिनमें अब तक भी
इस दकियानूसी समाज के लिए क्रोध था
जिसका विरोध करने के कारण ही उसकी जान ली गई ।

बुधवार, 12 अगस्त 2009

'प्यार' का मतलब

'प्यार' जैसे शब्द
'प्यार' जैसा शब्द
'प्यार' याकि शब्द
क्या प्यार सिर्फ़ शब्द भर है ?
शायद
आप कहें
नही
यकीनन____आप कहेंगे नही ।
लेकिन
प्यार एक शब्द ही तो है
क्योंकि शब्द ब्रह्म है ।
शब्द 'नाद' है
'नाद' बिन्दु वाला नहीं
आवाज़ वाला

हाँ !
प्यार शब्द है ---आवाज़ है ।

अब्राहम लिंकन की टोन में कहूं तो ---
दिल की , दिल द्वारा , दिल के लिए
विश्वास की ,विश्वास के लिए ,विश्वास के साथ

पुकार है ये

इसलिए ---
'प्यार' शब्द है मेरे लिए ।
(पुन: प्रकाशित )

बुधवार, 5 नवंबर 2008

लत

एक युग था राम का
एक युग था कृष्ण का
एक रावण-कंस का
और
एक युग है हमारा
यहाँ सब है सबके पास
पर
नहीं है कोई
किसी के साथ
इसलिए
ये युग तो सबका है
पर
इस युग का कोई नहीं
यहाँ
ये कहना , कि वो मेरे साथ है
स्वयं को धोखा देना है
और
हम अब भी सबको अपने साथ मानते हैं
हमें शराब की,
सिगरेट की,
लड़की की लत नहीं
क्योंकि
हमें धोखा खाने की लत लग गई है ।

सोमवार, 27 अक्टूबर 2008

दिवाली मुबारक हो





कल दीपावली है

कुछ लोग

पटाखे जलाएंगे

कुछ लोग

दिल ।

एक तबका वो होगा

जिसके बंग्लो और कोठियो पर

लड़ियों की जगमगाहट होगी

कीमती मोमबत्तियाँ और दिये जलेंगे

और एक वो

जहाँ शायद चूल्हा भी ना जले ।


शराब की

सप्लाई के साथ डिमांड भी बढ़ जाएगी

जुआरियों के लिए

जश्न का दिन होगा कल

ना जाने कितनो की दिवाली होगी

और कितनो का दिवाला निकलेगा ।


राजधानी में पुलिस

अपनी जेब गरम करेगी ।


घरों में

लक्ष्मी की पूजा होगी

लेकिन बाहर लक्ष्मी,

लक्ष्मी की आस में

लक्ष्मणरेखा पार कर रही होगी ।


ऐसे ही दिवाली मनेगी

हर साल मनती है

मैं पिछले कई सालों से

यही देखता आया हूँ

'दिवाली मुबारक हो ' के पोस्टर

चौराहों पर चिपके मिलेंगे

जिसमें बेगै़रत नेता

बदसूरत छवि लिए

हाथ जो़ड़े दिखेंगे ।

जो इन्हीं पोस्टरों के पीछे से कहेंगे

कि

चाहे किसी के पास कुछ हो

या ना हो

भले ही किसी के घर में

आग लगे-चोरी हो

चाहे दिल्ली में कोई

सुरक्षित हो या ना हो

चाहे कहीं पर भी लोग मरें-ब्लास्ट हो

पर सभी को

हमारी तरफ़ से

"दिवाली मुबारक हो ।"

(पुन: प्रकाशित )

शनिवार, 18 अक्टूबर 2008

आवाज़

मैंने कब कहा
मुझे तुम प्यार करो ।


मैंने कब कहा
मेरा ध्यान रखो ।


मैंने कब कहा
मुझे दुलारा करो ।



बस


मुझे पेट में न मारा करो ।

कोई होता जिसको अपना.......


जिन लोगों के घर नही होते
वो बाहर जाकर
फुटपाथ पर चलते
निठल्ले घूमते
दिखते.....
उन्हें घर की बदहवासी का
लोगों की नज़रंदाज़ी का
सड़कों की बदइंतज़ामी का
पूरा ख़याल होता है ।

जिन लोगों के घर होते हैं
वो घर के भीतर
डरे-सहमे खिड़कियों से झांकते
दिखते....
उन्हें घर की दीवारों के सूनेपन का
बाहर की
भागती
ज़िन्दगी की घुटन का
पूरा ख़याल होता है ।

पर

जिन लोगों के घर
होकर भी नहीं होते
वो घर में रहकर भी
बाहरी
बाहर जाकर भी
बाहरी
बनकर
दोस्तों के साथ बातें करते
अपनी रातों को दिन बनाते
ब्लॉग लिखते
सोती आँखों को जगाते
बिना खाए सोते
दिखते....
चूँकि वो
ना तो घर पर
और ना ही बाहर,
किसी को मिलते,
उनका ना तो घर को ,
ना बाहर को
ख़याल होता है

बस

उनके आगे तो
एक यही सवाल होता है
क्या आज भी घर जाकर ,
भूखे
सोना होगा
क्योंकि
अब तक तो
रसोई का दरवाज़ा बंद हो चुका होगा
घरवाले सो चुके होंगे।
हाँ।
जीने का दरवाज़ा खुला होगा
क्योंकि उनको लगा होगा
कि एक शख़्स
इस सराय में
सोने के लिये
आने वाला है .....................शायद ।