
कल दीपावली है
कुछ लोग
पटाखे जलाएंगे
कुछ लोग
दिल ।
एक तबका वो होगा
जिसके बंग्लो और कोठियो पर
लड़ियों की जगमगाहट होगी
कीमती मोमबत्तियाँ और दिये जलेंगे
और एक वो
जहाँ शायद चूल्हा भी ना जले।
शराब की
सप्लाई के साथ डिमांड भी बढ़ जाएगी
जुआरियों के लिए
जश्न का दिन होगा कल
ना जाने कितनो की दिवाली होगी
और कितनो का दिवाला निकलेगा ।
घरों में
लक्ष्मी की पूजा होगी
लेकिन बाहर लक्ष्मी,
लक्ष्मी की आस में
लक्ष्मणरेखा पार कर रही होगी ।
ऐसे ही दिवाली मनेगी
हर साल मनती है
मैं पिछले कई सालों से
यही देखता आया हूँ
'दिवाली मुबारक हो' के पोस्टर
चौराहों पर चिपके मिलेंगे
जिसमें बेगै़रत नेता
बदसूरत छवि लिए
हाथ जो़ड़े दिखेंगे ।
जो इन्हीं पोस्टरों के पीछे से कहेंगे
कि
चाहे किसी के पास कुछ हो
या ना हो
भले ही किसी के घर में
आग लगे-चोरी हो
चाहे दिल्ली में कोई
सुरक्षित हो या ना हो
चाहे कहीं पर भी लोग मरें, ब्लास्ट हो
पर सभी को
हमारी तरफ़ से
'दिवाली मुबारक हो ।'
(पुन: प्रकाशित )