नया ज्ञानोदय के मई अंक में बद्री नारायण की कविता 'पेड़ की शोकसभा' वर्तमान हालातों को देखते हुए बहुत जानदार जान पड़ती है जिन लोगों ने बद्री नारायण की कविता 'प्रेम-पत्र' पढ़ी होगी वो उनके पहले ही मुरीद होंगे . उनका एक अलग ही अंदाज़ है कविता कहने का, वे कविता में माम्लातों को बातों की शक्ल में बयाँ करते है एक बानगी देखिये-
एक पेड़ की शोकसभा में आमंत्रित है आप
आइये पेड़ की शोकसभा में
आइये
कल जनतंत्र और राजसत्ता ने
उतार कर मानवीय चेहरा
तोप, बम, हेलिकॉप्टर
कर दिया था तैनात
रात भर के चले अर्धसैनिक बलों के अभियान में
यह पेड़ अंतत: मारा गया
देखिये खबर लहरिया अख़बार के पांचवे पेज के चौथे कॉलम
की न्यूज़ है यह..
पूरी कविता पढने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें www.jnanpith.net
तुम्हारे बारे में क्या कहूं मै, मेरी तमन्नाओं का सिला है. नहीं मिला जो तो मुझको क्या है, मिलेगा तुमको ये आसरा है.
शुक्रवार, 21 मई 2010
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
-
►
2009
(32)
-
►
November
(8)
- पर चूंकि प्रेम को मैं...(का अन्तिम अंश)
- पर चूँकि प्रेम को मै एक सम्भावना मानता हूँ,....
- यहाँ मकानों की बुलंदी आदमी की.....
- भाषा थोपी नही जाती, अपनाई जाती है क्या ये बताना पड़...
- दुनिया है एक बुढ़िया का यहाँ से वहाँ जाना.....
- समाजवादी बिरादरी की चिंता और बढ़ गई है..
- तुम दुनिया हो, जिसके कोई चेहरा नहीं होता...
- वाकई वो बहुत दुखद समय था...
-
►
November
(8)
1 टिप्पणियाँ:
bahut hi umda aur saamyik rachna...
एक टिप्पणी भेजें