"मैं तुम्हे चाहता हूँ"
यही कहा था उसने
कि आसमान सिर पे आ गिरा था उसके
मुझे याद है अब भी
वो मेरी गली का सबसे होशियार लड़का था
कोलेज में अव्वल आया था
लडकियां मरती थी उस पर
पर उसका दिल सिर्फ एक पर आया था
लोग कहते हैं कि वो उसकी बहन थी
'बहन'
बहन कैसे?
मैं तो इकलौता लड़का हूँ
वह बार रिरियाता था
अरे !
दूर के रिश्ते की
वो बहुत खूबसूरत थी
नाम मुझे याद नहीं आ रहा
बहुत ही प्यारा नाम था उसका...
दोनों एक-दूसरे को बहुत चाहते थे
फिर एक दिन
उसकी लाश
यमुना पुश्ते पर मिली
यही बताया था मोहल्ले के एक बुज़ुर्ग ने मुझे
कुछ समझ न आया
अजब सी गंध थी मोहल्ले में उस दिन
फिजा में दो शब्द ताल ठोंक रहे थे
खाआआअ ...........प
तुम्हारे बारे में क्या कहूं मै, मेरी तमन्नाओं का सिला है. नहीं मिला जो तो मुझको क्या है, मिलेगा तुमको ये आसरा है.
सोमवार, 23 अगस्त 2010
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2 टिप्पणियाँ:
आज भी लोग ऐसा अत्याचार करते हैं ...
मार्मिक रचना
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