शनिवार, 18 अक्तूबर 2008

आवाज़

मैंने कब कहा
मुझे तुम प्यार करो ।


मैंने कब कहा
मेरा ध्यान रखो ।


मैंने कब कहा
मुझे दुलारा करो ।



बस


मुझे पेट में न मारा करो ।

8 टिप्‍पणियां:

manvinder bhimber ने कहा…

मैंने कब कहा
मुझे तुम प्यार करो ।
मैंने कब कहा
मेरा ध्यान रखो ।
dil ko chu gai hai ....
bahut sunder

रंजना ने कहा…

saarthak aur marmik.

seema gupta ने कहा…

बस

मुझे पेट में न मारा करो । "uf! kitnee dard bhree aavaj hai ye ek ajanmey kee, magar kya koee sunta hai is aavaj ko.... hume to rula gyee yee panktiyan.."

Regards

ravindra vyas ने कहा…

मार्मिक। पेट पर नहीं, दिल पर चोट करती हुई..
जिअो प्यारे और सहन करने की ताकत भी हासिल करो।

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत अच्छा...आपको और आपके परिवार को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

श्यामल सुमन ने कहा…

अक्ल तय करती है लम्हों का सफर सदियों में।
इश्क तय करता है लम्हों में जमाने कितने।।

दीपावली की शुभकामनाएँ।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

tarun ने कहा…

आपको कविता पसंद आई । आपने इसकी अहमियत को समझा ये मेरे लिए सुकून की बात है । वरना यहाँ कविता के नाम पर सिर्फ बयानबाजी और मज़ाक़ ही अधिक हो रहा है । मेरी हमेशा ही कोशिश रही है कि मैं कविता में उन सभी समकालीन दायित्वों का निर्वाह करूँ जो हमारे समय के काफी सारे लोग नही कर रहे हैं क्योंकि मेरे लिए कविता हमेशा से ही छोटी-छोटी बातों की चुभन से और भागती जिन्दगी की घुटन से साक्षात्कार करने-कराने का सशक्त माध्यम रही है ।

kesirahi.blogspot.com ने कहा…

bhut aacha sahi ja rahe hoe. pyar mango mat pyar ko cheen lo ya loot lo. kya hai aaj ka pyar ka style?