शुक्रवार, 7 नवंबर 2008

ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा ..........

रोज़ की तरह आज भी डी.टी.सी देर से मिली , वो भी नई वाली । जी हाँ , वही बस जिस पर विपक्ष ने दिल्ली सरकार को बार-बार घेरा है । हरी वाली बस । इसमे तकनीकी ख़ामियों की चर्चा पहले भी होती रही है लेकिन हर बार कुसूर मशीनरी का ही नही होता , आदमी नाम की मशीन में वास्तविक मशीन से ज़्यादा गड़बड़झाला है । वह क़दम-क़दम पर प्रयोग करता चलता है जैसे चलते-चलते सड़क पर पड़ी खाली बोतल , डब्बो पर लात मारना । सोते हुए कुत्तों पर पत्थर फैंकना या फिर पत्थर की असुविधा होने पर , लात से ही काम लेना । वह यह देखता चलता है कि ऐसा करने से क्या होगा । वैसा करने पर क्या होगा ।
प्रयोग करना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन इसे करते वक़्त दूसरों की सुविधा-असुविधा का ख़याल न रखता ज़रूर ग़लत है । आज बस में भी ऐसा ही कुछ हुआ । बस काफी स्मूथ चल रही थी लेकिन एक सज्जन को अगले गेट पर लगा लाल बटन परेशान कर रहा था । उसने तुरंत ही इस परेशानी को प्रयोग में बदलने के लिए बटन को पुश कर दिया , स्मूथ चल रही बस में ख़ामी आनी लाज़मी थी । ड्राइवर ने जब उससे पूछा कि तूने ये बटन क्यों दबाया तो उसका वही आन्सर था जो अधिकतर लोगो का ग़लती करने पर होता है । उसने कहा मैंने तो ऐसे ही दबा दिया .। देख रहा था क्या होगा । बस रुक गयी थी वो सज्जन उतर गए लेकिन उन साहब की वजह से हमें २० मिनट तक रुकना पड़ा । ड्राइवर ने सब सवारियों को एक ही सुर में कोसना शुरू , खैर इंजन की ख़ामी दूर हुई हम चल पड़े । तभी मेरे बराबर में बैठे लड़के के मोबाइल पर एक गाना बजा । बोल थे ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा । मेरा ग़म कब तलक मेरा दिल तोड़ेगा ...............। ये गाना हमारी सिचुएशन पर कितना फिट बैठ रहा था । रंग की जगह बटन लगा दो तो भी कोई दिक्कत नही होगी ।

7 टिप्‍पणियां:

पुनीत ओमर ने कहा…

हर नई तक्नीती शुरुआत में कुछ न कुछ ऐसा लाती है की इस्तेमाल करने वाले लोग उन लोगों के सामने फजीहत का पात्र बनें जो पहले से ही तकनीकी की समझ रखते हैं.

जितेन्द़ भगत ने कहा…

tarun ji इसी की पैरोडी में कहना चाहूँगा-
सवाल- ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा
जवाब- जब तलक तू उसे नहीं तोड़ेगा
:)

Rohit Tripathi ने कहा…

Adhik pryog karna bhi kabhi kabhi bhari pad jata hai :-)

New Post : खो देना चहती हूँ तुम्हें.. Feel the words

डॉ .अनुराग ने कहा…

सही है देख रहा था की दबा दूँ तो क्या होगा ........वाह रे हिन्दुस्तानी

मुन्ना पांडेय(कुणाल) ने कहा…

उस ससुरे का कोई दोष नहीं हैं मित्र ..बस 'सब चलता है'-वाली मानसिकता का चक्कर है
और हाँ 'प्रेमनगर'के उस गाने की सिचुएशन तुम्हारे अकोर्डिंग यह होनी चाहिए
'ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा?
(तरुण उसे पीना,देखना जब छोडेगा...समझे)

विनीत कुमार ने कहा…

koi nahi, waha kaccha maal khoja karo

विनीत कुमार ने कहा…

koi nahi, waha kaccha maal khoja karo